November 23, 2020

लखनऊ विश्वविद्यालय की आयुर्वेदिक फैकल्टी में योग शिविर, कुंठा, निराशा, क्रोध से निपटने के बताए तरीके

Lu beats : Lucknow

लखनऊ विश्वविद्यालय के शताब्दी सामारोह के अवसर पर सोमवार को चतुर्थ योग शिविर का आयोजन राजकीय आयुर्वेदिक, महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, आयुर्वेद फ़ैकल्टी में आयोजित किया गया ।  उद्घाटन प्रो. पी. एस. सक्सेना प्राचार्य एवं डीन, आयुर्वेद फ़ैकल्टी द्वारा किया गया।  योग शिविर में सम्बोधित करते हुए डॉ सक्सेना ने बताया कि योग आज की आवश्यकता बन गया है । आने वाले भविष्य में जीवन की निरंतरता के लिए योग आवश्यक होगा । विश्व पटल पर स्वास्थ्य की समस्यओं को निराकरण करने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।


डॉ अमरजीत ने अपने सम्बोधन में बताया कि मनुष्य ने विकास की उच्चतम शिखर को स्पर्श कर लिए है वही दूसरी ओर जीवम जीने की कला का ज्ञान न होने से मानव हतास एवं निराश भी है।  पहले की अपेक्षा वर्तमान में मानशिक रोगों की संख्या बेतहाशा बढ़ रही है । जिसमे कुंठा, निराशा, क्रोध, याददाश्त कमजोर, अनिद्रा, तनाव, प्रमुख हैं। यह बीमारिया व्यक्ति के स्वभाव एवं जीवन जीने की पद्धति को बदल देती हैं और ग्रषित व्यक्ति के अंदर निरंतर संघर्ष बना रहता है । मानशिक बीमारियों के प्रबंधन एवं बचाव के लिए आज के योग शिविर में योगिक शुक्ष्म व्ययामो के साथ साथ कपोल शक्ति विकासक क्रिया, नेत्र विकासक क्रिया, जानुशिरासन, पवनमुक्तासन, नटराजन, भद्रासन, तथा सूर्य नमस्कार कराया गया, प्राणायामों में नाड़ी शोधन, भ्रामरी, उद्गीत, का अभ्यास कराया गया।

  योग निद्रा एवं ध्यान सत्र के बाद शिविर का समापन हुआ । इस अवसर पर आयुर्वेदिक कॉलेज के शिक्षक, चिकित्सक, कर्मचारि, स्थानिय लोग एवं बड़ी संख्या में छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे।

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