July 9, 2021

संस्कृत को मृत बताने पर घिरा LU, संस्कृत भारती ने लगाए यह गंभीर आरोप

लखनऊ : लखनऊ विश्वविद्यालय में संस्कृत को मृत भाषा बताए जाने पर शुरू हुआ विवाद गहराता जा रहा है. संस्कृत भारती के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ वार्ता कर इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराएं. संगठन की ओर से अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की जाने की मांग की गई है.

यह है मामला
लखनऊ विश्वविद्यालय में गुरुवार को संस्कृत भाषा को लेकर घमासान शुरू हो गया. लखनऊ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग की ओर से एक व्याख्यान का आयोजन किया गया. इसका टापिक ‘द राइज आफ मार्डन वर्नाकुलर एंड डेथ आफ संस्कृत : रीडिंग ईश्वर चंद्र विद्यासागर’ रखा गया. लविवि के अंग्रेजी विभाग की ओर से गुरुवार शाम साढ़े चार बजे से लेक्चर सीरिज के तहत आनलाइन व्याख्यान होना प्रस्तावित किया गया. संस्कृत को मृत बताए जाने को लेकर विद्वान नाराज हैं.

यह हैं आपत्तियां
संस्कृत भारती अवध प्रांत  के जेपी सिंह,  शोभन लाल उकील,  बृजेश बर्थवाल, हनुमंत सिंह,  अनुज जी, रत्नेश ने कुलपति आलोक कुमार राय को ज्ञापन सौंपा. महानगर लखनऊ संस्कृत भारती, अवध प्रांत के सम्पर्क प्रमुख अनुज शुक्ल  ने बताया कि इसकी आयोजिका प्रो. रानू उनियाल थी, जिनके द्वारा यह विषय चयनित किया गया. इससे यह प्रतीत होता है कि संस्कृत के प्रति उनके मन में दुर्भावनाएं है. विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने यह स्वीकार किया है कि इस आयोजन की अनुमति भी विश्वविद्यालय से नहीं ली गयी थी.
उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान की सूचीबद्ध आधिकारिक भाषाओं में से एक है उस संस्कृत भाषा को मृत बताना संविधान और देश के प्रति अनास्था प्रकट करने जैसा है.

यह मांग की गई

– संस्कृत भारती ने मांग कि भारत के संविधान और जनमानस की आस्था पर चोट पहुंचाने का दुःसाहस करने वाली आंग्लविभाग की विभागाध्यक्षा प्रो. रानू उनियाल पर कठोरतम दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए उनका निलम्बन किया जाए.

–   साथ ही, सार्वजनिक रूप से इस विषय के चयन करने के लिए माफी मांगने और अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किए जाने की मांग की गई है.

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